कश्मीर शैवदर्शन · दर्शनशास्त्र
स्पन्दकारिका Essence of Kashmir Shaivism
स्पन्द–तत्त्व का रहस्य : कश्मीर शैवदर्शन का एक आलोक
कश्मीर शैव संप्रदाय के अद्वितीय ग्रंथ स्पन्दकारिका का क्रमबद्ध, दार्शनिक तथा व्यावहारिक अध्ययन। शिवतत्त्व, चेतना, ज्ञान, बन्धन और मोक्ष की गूढ़ व्याख्या — मूल संस्कृत पाठ के साथ।
इस पाठ्यक्रम के विषय में
चैतन्य की कम्पनात्मक सत्ता का अध्ययन
'स्पन्दकारिका', जिसका प्रणेता परंपरानुसार वसुगुप्त (या उनके शिष्य कल्लट भट्ट) माने जाते हैं, कश्मीर शैवदर्शन में 'स्पन्द' — अर्थात् चैतन्य की सूक्ष्म कम्पनात्मक सत्ता — के सिद्धान्त को प्रतिपादित करने वाला मूल ग्रंथ है।
इस पाठ्यक्रम में भांडारकर ओरिएन्टल रिसर्च इन्स्टिट्यूट की शताब्दी पुरानी शोध-परम्परा के अनुसार समस्त स्पन्दकारिकाओं का क्रमबद्ध, दार्शनिक तथा व्यावहारिक परिप्रेक्ष्य में अध्ययन कराया जाएगा। मूल संस्कृत पाठ के साथ उसकी व्याख्या तथा आधुनिक बौद्धिक विमर्श से उसका संबंध भी समझाया जाएगा।
इसमें शिवतत्त्व, चेतना, ज्ञान, बन्धन और मोक्ष की गूढ़ व्याख्या सूत्ररूप में की गई है। चार निःष्यन्दों में विभक्त यह ग्रंथ — स्वरूप, सहजविद्या, विभूति, और अन्तिम तत्त्व — चेतना के प्रत्येक आयाम को स्पर्श करता है।
यह पाठ्यक्रम केवल शास्त्र-अध्ययन नहीं, अपितु चेतना के सूक्ष्म आयामों का आत्मानुभव करने की एक सुसंगठित साधनायात्रा भी है।
इस पाठ्यक्रमको आर्थिक सहाय्य करनेकेलिये हम डॉ. रविंद्र कुलकर्णीजी के आभारी है ।
पाठ्यक्रम संरचना
व्याख्यान क्रम
15 व्याख्यान · 4 निःष्यन्द · 15 घण्टे
यस्योन्मेषनिमेषाभ्यां जगतः प्रलयोदयौ।
तं शक्तिचक्रविभवप्रभवं शङ्करं स्तुमः॥
व्याख्याता
पाठ्यक्रम प्रवक्ता
श्री प्रणव गोखले
असिस्टेंट डायरेक्टर, वैदिक संशोधन मंडल, पुणेश्री प्रणव गोखले पुणे के प्रसिद्ध वैदिक संशोधन मंडल के असिस्टेंट डायरेक्टर हैं। वे दर्शनशास्त्रों में अपनी PhD का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने संस्कृत भाषा में M.A. हासिल की है, और M.A. के दौरान "वेदांत तत्वज्ञान" उनके अनुसंधान का मुख्य विषय था। श्री प्रणव गोखलेजी के रिसर्च पेपर अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हुए हैं।
सामान्य प्रश्न
क्या इस पाठ्यक्रम के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है?+
नहीं। व्याख्यान हिन्दी माध्यम में हैं और मूल संस्कृत श्लोकों की व्याख्या हिन्दी में दी जाएगी। संस्कृत की पूर्व-जानकारी सहायक हो सकती है, परंतु अनिवार्य नहीं है।
यह पाठ्यक्रम स्वगतिक (self-paced) है — इसका क्या अर्थ है?+
सभी 15 व्याख्यान रेकॉर्डेड हैं। आप अपनी सुविधानुसार, अपनी गति से, कभी भी और कहीं से भी अध्ययन कर सकते हैं। एक बार खरीदने पर Lifetime Access मिलता है।
₹1,200 में क्या-क्या सम्मिलित है?+
15 व्याख्यान (लगभग 15 घण्टे), Lifetime Access, और पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र। यह एकबारगी भुगतान है — कोई मासिक शुल्क नहीं।
क्या बाज़ार में इसके जैसा कोई और पाठ्यक्रम उपलब्ध है?+
स्पन्दकारिका पर इस गहराई का, मूल संस्कृत पाठ पर आधारित, प्रामाणिक शोध-संस्थान द्वारा प्रस्तुत हिन्दी माध्यम का पाठ्यक्रम वर्तमान में अन्यत्र उपलब्ध नहीं है।
यह पाठ्यक्रम किनके लिए उपयुक्त है?+
यह उपक्रम उन सभी जिज्ञासुओं, शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए उपयोगी होगा जो भारतीय दर्शन की इस रहस्यपूर्ण धारा को प्रामाणिक आधार पर जानना चाहते हैं।
चेतना के सूक्ष्म आयामों की साधनायात्रा
भांडारकर ओरिएन्टल रिसर्च इन्स्टिट्यूट की शताब्दी पुरानी शोध-परम्परा के साथ, कश्मीर शैवदर्शन के मूल ग्रंथ का प्रामाणिक अध्ययन।
एकबारगी भुगतान · Lifetime Access · प्रमाणपत्र सम्मिलित